रिपोर्टर : मोनोज तालुकदार, गुवाहाटी, असम, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली बटद्रवा में 221 करोड़ रुपये की लागत से बने 13 परियोजनाओं का उद्घाटन किया। अपने भाषण में उन्होंने कहा— “आविर्भाव क्षेत्र को जनता के लिए खोलने का अवसर पाकर मैं स्वयं को धन्य मानता हूँ। इस परियोजना का भूमिपूजन मैंने ही किया था। यह आविर्भाव क्षेत्र युगों-युगों तक बना रहेगा। आविर्भाव क्षेत्र में प्रवेश करते ही मन और मस्तिष्क स्थिर हो जाता है। मैं असम के मुख्यमंत्री को धन्यवाद देता हूँ।” मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने अपने आदरणीय भाषण में कहा— “बोरदोवा! इस शब्द के साथ असम और असमिया समाज का एक आत्मिक तथा ऐतिहासिक संबंध जुड़ा हुआ है। यह पवित्र भूमि हमारी राष्ट्रीय जीवन के महानायक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की पवित्र जन्मभूमि तथा धर्म-संस्कृति का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के आविर्भाव क्षेत्र को आज जनता के लिए खोल दिया गया है। आज का दिन असमिया जाति के लिए एक पवित्र दिन है। पहले बटद्रवा में बाहरी लोगों द्वारा सत्र की भूमि पर अतिक्रमण किया गया था।” “भाजपा के शासनकाल में बटद्रवा को अतिक्रमण-मुक्त किया गया।” आकाशी गंगा के तट पर 165 बीघा भूमि पर इस परियोजना का निर्माण किया गया है। संपूर्ण सांस्कृतिक परियोजना को एक वृक्ष के स्वरूप में आधार बनाकर विकसित किया गया है, जिसमें महापुरुष के जीवन के प्रारंभ से अंत तक के सभी अध्याय शाखा-प्रशाखाओं के रूप में चित्रित किए गए हैं। पारंपरिक स्थापत्य और असम की सांस्कृतिक विशेषताओं को समाहित करते हुए, महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के जीवन-यात्रा के चित्रण से इस परियोजना के भवनों को सजाया गया है। विभिन्न वाद्ययंत्रों, नृत्य प्रस्तुति शैलियों और जीवन-शैली के प्रतीकों के रूप में उप-भवनों का निर्माण किया गया है। श्रीकृष्ण के जीवन-वृत्त से संबंधित प्रदर्शनी के साथ-साथ नाटक, भाओना आदि के मंचन हेतु रंगमंच, प्रदर्शन कलाओं के लिए कला केंद्र, जलपान गृह और आवास की व्यवस्था की गई है। पर्यटकों के ठहरने के लिए यात्री निवास, जनजातीय यात्री निवास, पर्यटकों और कर्मचारियों के लिए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु स्वास्थ्य केंद्र, पर्यटकों के अवकाश बिताने तथा नामघर संस्कृति से जुड़ी कलाओं के दर्शन की सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। साथ ही मणिकांचन गृह, बटवृक्ष प्रांगण तथा अन्य सुविधाएँ जैसे— मणिकांचन जलाशय, सुरक्षा के लिए निगरानी टावर, पैदल पथ, वाहनों की पार्किंग व्यवस्था आदि को भी इस परियोजना में सम्मिलित किया गया है। बटद्रवा परियोजना के निर्माण के पीछे नुरुद्दीन अहमद और उनके दो पुत्र— राज अहमद तथा दीप अहमद का योगदान है। पिता-पुत्रों ने गुरु-आसन, कृष्णलीला और विष्णु के दशावतार को सजीव रूप प्रदान किया। इसके लिए उन्हें भागवत, कीर्तन और सांचिपात की पांडुलिपियों का गहन अध्ययन करना पड़ा। नुरुद्दीन अहमद, राज अहमद और दीप अहमद के प्रति असम की जनता कृतज्ञता व्यक्त करती है।


