रिपोर्टर : मोनोज तालुकदार, गुवाहाटी, असम, कल 30 दिसंबर की दोपहर बजाली ज़िले के मेधिकुशी में 120 बीघा भूमि पर 52.99 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित और एक महान विद्वान तथा असमिया गद्य साहित्य के जनक, भट्टदेव के नाम से प्रसिद्ध वैकुंठनाथ भागवत भट्टाचार्य के नाम पर समर्पित, नए स्वरूप में सुसज्जित बजाली स्थित भट्टदेव विश्वविद्यालय के दूसरे परिसर का उद्घाटन करते हुए असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय के निर्माण के दूसरे चरण के लिए 65 करोड़ रुपये की आवश्यकता होने की जानकारी कुलपति द्वारा दिए जाने के बाद, मैंने आज की सभा में ही 65 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की है और लोक निर्माण विभाग के आयुक्त-सचिव को इसकी ज़िम्मेदारी सौंपी है। विश्वविद्यालय को यथाशीघ्र पूर्ण स्वरूप देने के लिए हम निरंतर प्रयास करते रहेंगे।” भट्टदेव विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अरिंदम तालुकदार ने कार्यक्रम की उद्देश्य व्याख्या की तथा कुलपति प्रोफेसर धनपति डेका ने स्वागत भाषण दिया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा मंत्री के रूप में मुझे बोडोलैंड विश्वविद्यालय, भट्टदेव विश्वविद्यालय, माधवदेव विश्वविद्यालय और रवींद्रनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना यात्रा से स्वयं को जोड़ने का सौभाग्य मिला। 2016 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मैंने पाठशाला में बजाली को ज़िला बनाने और एक उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने का वादा किया था। उस वादे के अनुरूप आज भट्टदेव विश्वविद्यालय की यह यात्रा हम सभी बजालीवासियों के लिए विशेष गौरव का विषय बन गई है।” उन्होंने आगे कहा कि बजाली महाविद्यालय की समृद्ध परंपरा की नींव पर स्थापित भट्टदेव विश्वविद्यालय शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास रखने वाले असंख्य व्यक्तियों की दूरदर्शिता, परिश्रम और निष्ठा का साक्ष्य है। इस शुभ अवसर पर उन्होंने बजाली महाविद्यालय के संस्थापक प्राचार्य स्वर्गीय कामेश्वर दास को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व में 1955 में बजाली महाविद्यालय की स्थापना हुई थी और आज वही महाविद्यालय एक पूर्ण विश्वविद्यालय में रूपांतरित हो चुका है। छह दशकों के गौरवशाली इतिहास वाले बजाली महाविद्यालय का विश्वविद्यालय में उन्नयन असम के शैक्षिक क्षेत्र के लिए एक गर्वपूर्ण अध्याय है। गुवाहाटी विश्वविद्यालय को छोड़कर पूरे निचले असम में लंबे समय से एक विश्वविद्यालय की कमी महसूस की जा रही थी, जिसे भट्टदेव विश्वविद्यालय ने पूरा किया है। साथ ही यह अपने अंतर्गत आने वाले महाविद्यालयों को शैक्षिक मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि असमिया गद्य साहित्य के जनक वैकुंठनाथ भागवत भट्टाचार्य, जिन्हें भट्टदेव के नाम से जाना जाता है, की स्मृति में विश्वविद्यालय का नामकरण करना उनके प्रति हमारी श्रद्धा का एक विनम्र प्रयास है। इस ऐतिहासिक दिन पर उन्होंने महापुरुष भट्टदेव को गहन श्रद्धांजलि अर्पित की। भट्टदेव की रचनाओं का विस्तार से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि असमिया भाषा, साहित्य और बौद्धिक परंपरा में उनके अपार योगदान के सम्मान में ही राज्य सरकार ने इस विश्वविद्यालय का नाम भट्टदेव विश्वविद्यालय रखा। 24 जून 2019 को पहले कुलपति के पदभार ग्रहण के साथ औपचारिक रूप से स्थापित भट्टदेव विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक क्षेत्र में क्रमशः सशक्त पहचान बनाई है। वर्तमान में विश्वविद्यालय में 19 विभागों में स्नातक तथा 10 विभागों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। साथ ही रसायन विज्ञान, संस्कृत और वाणिज्य विभाग में पाँच वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं, जो उत्कृष्टता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। सभी विभागों में नई शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू किया जाना विश्वविद्यालय की प्रगतिशील यात्रा का स्पष्ट उदाहरण है। शैक्षणिक गतिविधियों के अतिरिक्त, हाल ही में भट्टदेव विश्वविद्यालय एक संबद्ध विश्वविद्यालय के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रहा है। बरपेटा और बजाली ज़िलों के कुल 22 महाविद्यालय अब भट्टदेव विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। लगभग 20,000 छात्र-छात्राएँ इस विश्वविद्यालय में पंजीकृत होकर अध्ययनरत हैं। एक नवस्थापित शिक्षण संस्थान होने के बावजूद, अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, इंडियन नेशनल साइंस अकादमी, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और एएसटीईसी जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थाओं से कई शोध परियोजनाएँ प्राप्त करना विश्वविद्यालय की अग्रणी यात्रा का प्रमाण है। विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापकों के शोध पत्र यूजीसी मान्यता प्राप्त जर्नलों, स्कोपस और वेब ऑफ साइंस में प्रकाशित होना भी गर्व का विषय है। प्राचीन परंपराओं को आत्मसात कर नई पीढ़ी को कौशलयुक्त बनाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में हाल ही में भारतीय ज्ञान परंपरा और कौशल विकास के दो केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। पीएम-उषा योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय को प्राप्त 20 करोड़ रुपये के अनुदान से बुनियादी ढाँचे और उन्नत शोध सुविधाओं को मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विश्वविद्यालय को दिखाए गए सहयोग के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया। असम सरकार ने उच्च शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को सशक्त बनाने के लिए इस विश्वविद्यालय को 120 बीघा भूमि स्वीकृत की थी और 52 करोड़ रुपये की लागत से आज इसका नया भवन तैयार हुआ है। यह नया परिसर बरपेटा और बजाली ज़िलों में शिक्षा के एक नए जागरण का सूत्रपात करेगा। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री तथा पाटाछारकुची विधानसभा क्षेत्र के विधायक रणजीत कुमार दास, बरपेटा लोकसभा क्षेत्र के सांसद फणीभूषण चौधरी, भवानीपुर के विधायक फणीधर तालुकदार, भट्टदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर धनपति डेका, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव नारायण कोंवर, लोक निर्माण विभाग के विशेष आयुक्त-सचिव चंदन शर्मा, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर मनजीत दास, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएँ तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित असम के शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगु ने अपने संबोधन में कहा कि असम में विकास की एक नई लहर चल रही है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे बुनियादी ढाँचे विकसित हो रहे हैं, जिनसे समग्र प्रगति का वातावरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि असम की भाषा, संस्कृति और विरासत को स्थानीय के साथ-साथ वैश्विक मानकों तक पहुँचाना होगा और इसके लिए भट्टदेव विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने इस विश्वविद्यालय को “स्मार्ट गवर्नेंस” और “स्मार्ट यूनिवर्सिटी” के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

