उन्नाव में गंगा का बढ़ता जलस्तर बना चिंता का विषय, बक्शर घाट स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर तक पहुंचा बाढ़ का पानी; प्रशासन अलर्ट, श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील।

News Publisher  

रिपोर्टर – रणजीत सिंह, उन्नाव :- जनपद उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। विशेष रूप से बक्शर घाट स्थित प्रसिद्ध मां चंद्रिका देवी मंदिर के आसपास का क्षेत्र जलमग्न होने लगा है। प्रशासन के अनुसार गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कुछ स्थानों पर प्रति घंटे लगभग तीन सेंटीमीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है तथा संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मां चंद्रिका देवी मंदिर क्षेत्र धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन गंगा का बढ़ता जलस्तर अब मंदिर परिसर और आसपास के घाटों तक पहुंचने लगा है। नदी का तेज बहाव और लगातार बढ़ता पानी स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की चिंता का कारण बन गया है। यदि जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो मंदिर परिसर से जुड़े निचले इलाके भी पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है। राजस्व विभाग, पुलिस, सिंचाई विभाग, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रही हैं। संवेदनशील गांवों और तटवर्ती क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके। जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। नदी के किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचें तथा बच्चों को अकेले घाट या नदी के पास न जाने दें। श्रद्धालुओं से भी अनुरोध किया गया है कि जलस्तर सामान्य होने तक घाटों पर विशेष सावधानी बरतें और प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करें। बाढ़ की आशंका को देखते हुए राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नावों, लाइफ जैकेट, प्राथमिक उपचार सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की भी तैयारी की गई है। पशुपालन विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दवाइयों, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी रखने तथा आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण करने को कहा गया है। नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों को जलभराव वाले क्षेत्रों में साफ-सफाई, फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाढ़ के दौरान बिजली के खंभों, टूटे हुए तारों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। नाव का प्रयोग केवल अधिकृत नाविकों के साथ ही करें तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस, तहसील प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दें। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों और कृषि उपकरणों के साथ-साथ पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखें। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे तटीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सुरक्षा और राहत संबंधी कदम तत्काल उठाए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं तथा लोगों से संयम और सावधानी के साथ प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।