गणेश चतुर्थी के पावन अवसर से एक दिन पूर्व रविवार को जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा महोत्सव के दौरान आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

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रिपोर्टर – आशीष अग्रवाल, श्रीगंगानगर, राजस्थान :- गणेश चतुर्थी के पावन अवसर से एक दिन पूर्व रविवार को जयपुर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा महोत्सव के दौरान आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगवान श्री गणेश को विशेष मेहंदी अर्पित कर उनका भव्य श्रृंगार किया गया। मेहंदी प्रसाद लेने के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस वर्ष भगवान गणेश के सिंजारा के लिए सोजत से करीब 3500 किलो मेहंदी मंगवाई गई। भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित करने के बाद इसे श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। मेहंदी वितरण के लिए पांच अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्था की गई तथा महिलाओं और कन्याओं के लिए अलग व्यवस्था भी रखी गई। मोती डूंगरी गणेशजी की इस विशेष मेहंदी को लेने के लिए राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों एवं शहरों से श्रद्धालु जयपुर पहुंचे। मेहंदी प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में लोग घंटों कतार में खड़े नजर आए। मोती डूंगरी गणेश मंदिर की मेहंदी को लेकर वर्षों से एक विशेष लोकमान्यता चली आ रही है। मान्यता है कि भगवान गणेश को अर्पित की गई इस मेहंदी का प्रसाद यदि कुंवारे युवक-युवतियां श्रद्धा से अपने हाथों पर लगाते हैं, तो विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और शीघ्र विवाह का योग बनता है। इसी लोकविश्वास के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में अविवाहित युवक-युवतियां और उनके परिवारजन विशेष रूप से इस मेहंदी को लेने जयपुर पहुंचते हैं। भक्तों के बीच यह परंपरा “चट मेहंदी, पट ब्याह” जैसी लोकप्रिय मान्यता के रूप में भी चर्चित है। हालांकि यह धार्मिक आस्था और लोकविश्वास है, इसकी कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। सिंजारा के अवसर पर भगवान गणेश का विशेष राजसी श्रृंगार किया गया। गणपति को विशेष पोशाक के साथ स्वर्ण मुकुट और नौलखा हार धारण कराया गया तथा उन्हें चांदी के सिंहासन पर विराजमान किया गया। मंदिर की भव्य सजावट और रोशनी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा और मेहंदी की यह परंपरा श्रद्धा, आस्था और लोकविश्वास का ऐसा संगम बन चुकी है, जो हर वर्ष हजारों भक्तों को जयपुर खींच लाती है।