असम के राज्यपाल ने ऊपरी असम के शैक्षणिक संस्थानों में एनईपी 2020 के कार्यान्वयन की समीक्षा की।

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रिपोर्टर : मोनालिसा मुसाहारी, आर्य नगर, गुवाहाटी, असम , 4 फरवरी,2026 :- असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने आज डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में ऊपरी असम के विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन की समीक्षा बैठक में भाग लिया। इसके साथ ही उन्होंने विद्यालयों में एनईपी 2020 के क्रियान्वयन की प्रगति का आकलन करने हेतु माध्यमिक शिक्षा के अधिकारियों के साथ एक संवादात्मक सत्र की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान राज्यपाल ने उप-कुलपतियों, प्राचार्यों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों तथा प्रख्यात शिक्षाविदों से फीडबैक लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों और विद्यालयों में किए जा रहे संरचनात्मक एवं शैक्षणिक सुधारों की समीक्षा की। चर्चा का मुख्य फोकस शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने, संस्थागत सुधारों तथा नीति उद्देश्यों के प्रभावी कार्यान्वयन पर रहा। राज्यपाल ने इस बात पर बल दिया कि एनईपी 2020 की परिकल्पना को साकार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों का सक्रिय सहयोग और प्रतिबद्धता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संस्थानों द्वारा अपनाए जा रहे छात्र-केंद्रित दृष्टिकोणों पर भी जोर दिया। बैठक के दौरान राज्यपाल ने राज्य की शिक्षा प्रणाली को एनईपी के प्रभावी कार्यान्वयन में एक आदर्श मॉडल बनाने हेतु नवीन दृष्टि, स्पष्ट दिशा और दीर्घकालिक लक्ष्य प्रस्तुत किए। एक पृथक संवाद में माध्यमिक शिक्षा निदेशक श्रीमती ममता होजाई ने विभाग द्वारा एनईपी 2020 के अंतर्गत की गई प्रगति और पहलों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने कौशल-आधारित शिक्षा, लैंगिक समानता के संवर्धन तथा माध्यमिक शिक्षा में गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने पर एनईपी के विशेष फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने विद्यालयों द्वारा बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल कौशल विकसित करने हेतु उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छात्रों को नर्सिंग सहायता की मूल बातें, सीपीआर और प्राथमिक उपचार जैसे स्वास्थ्य कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कामरूप मेट्रो में आयोजित एक स्किल कार्निवल के बारे में अवगत कराया, जहां छात्रों ने मंत्रियों और गणमान्य व्यक्तियों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की। संवाद के दौरान राज्यपाल ने छात्रों को राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) से जुड़ने के लिए प्रेरित करने के महत्व पर जोर दिया तथा विद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अभिभावक-शिक्षक बैठकों को नियमित रूप से प्रोत्साहित किया जाए और प्रत्येक वर्ष वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिससे छात्रों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने तथा अभिभावकों को विद्यालय के प्रदर्शन से अवगत कराने का अवसर मिल सके। शिक्षकों की भूमिका पर बल देते हुए राज्यपाल ने शिक्षकों से सहानुभूतिपूर्ण होने और ऐसा सहयोगी वातावरण बनाने का आग्रह किया, जहां छात्र अपनी समस्याओं पर खुलकर चर्चा कर सकें। इस संदर्भ में उन्होंने विद्यालयों में प्रतिदिन 30 मिनट का समर्पित छात्र-शिक्षक संवाद समय निर्धारित करने का सुझाव दिया। लोक भवन सचिवालय के सलाहकार डॉ. हरबंश दीक्षित ने अधिकारियों से दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों तक एनसीसी सुविधाओं के विस्तार हेतु लोक भवन को प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने विद्यालयों में स्वच्छता और साफ-सफाई को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला तथा सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का उल्लेख किया, जिसमें महिला शिक्षिका की निगरानी में विद्यालयों में सैनिटरी पैड की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। राज्यपाल ने युवाओं में मजबूत राष्ट्रभावना विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह उल्लेख किया कि देश ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष मना रहा है और सुझाव दिया कि शैक्षणिक संस्थान देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देने के लिए छात्र समूहों के बीच ‘वंदे मातरम्’ गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन करें। बैठक में एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस संवाद ने वित्तीय सीमाओं और शिक्षकों की कमी जैसी सामान्य चुनौतियों से परे जाकर सार्थक चर्चा को बढ़ावा दिया। इस अवसर पर राज्यपाल सचिवालय के ओएसडी प्रो. बेचन लाल, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जितेन हजारिका, डिब्रूगढ़ के उपायुक्त बिक्रम कैरी, स्कूल शिक्षा विभाग के सी एंड एस नारायण कोंवर, असम की माध्यमिक शिक्षा निदेशक ममता होजाई सहित ऊपरी असम के 10 जिलों के विद्यालय निरीक्षक उपस्थित थे।