“आघोणत कविता की चर्चा से कदमतल चौक में लौट आई कविताओं की खुशबू”

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रिपोर्टर : मोनोज तालुकदार, गुवाहाटी, नलबाड़ी ज़िले के टिहू के पास स्थित कदमतला चक। यह क्षेत्र प्राचीन समय से ही गीत–कविता और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध रहा है। बहुत पहले यहाँ “फिरिंगति” नाम की एक हस्तलिखित पत्रिका भी काफ़ी लोकप्रिय थी—स्थानीय लोगों के लिए यह एक गौरवपूर्ण अध्याय था। लेकिन दुर्भाग्यवश समय के साथ, व्यस्त जीवन के कारण ऐसे कार्यक्रम धीरे-धीरे कम होते चले गए। केवल इच्छा से कोई आयोजन ज़िंदा नहीं रखा जा सकता, समय भी देना पड़ता है। फिर भी इन्हीं परिस्थितियों के बीच इ. महीधर कलिता, हिमांशु पाठक, नितु कलिता और पंकज बजबड़ुआ के प्रयासों से कदमतला चक के राजीव गांधी महाविद्यालय में इसी 7 तारीख को “आघोनत कवितार आलाप” नाम का एक सुंदर कार्यक्रम आयोजित किया गया। लगभग 40 कवियों ने अपनी कविताएँ पढ़ीं। बर्णाली कलिता और पंकज डेका की कविताओं की प्रस्तुति से कदमतला चक एक बार फिर जीवंत हो उठा। पुलन गोस्वामी दैंगरिया ने कविताओं की बेहद सुंदर समीक्षा की। अच्छी बात यह रही कि क्षेत्र की कई गृहिणियाँ भी अपनी व्यस्तता से समय निकालकर केवल कविता के लिए वहाँ पहुँचीं। कुल मिलाकर इस कार्यक्रम के माध्यम से कदमतला चक एक बार फिर जीवन से भर उठा। ऐसे कार्यक्रम क्षेत्र की शोभा बढ़ाते हैं।