आदिवासी विकाश परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल के नेतृत्व ऐतिहासिक सभा; SDM को सौंपा 10 सूत्रीय ज्ञापन प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल का सरकार पर प्रहार —“कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान विभाग के सवालों से बचने के लिए विधानसभा से भागते हैं”

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रिपोर्टर: जितेंद्र वाणी, मध्यप्रदेश, आलीराजपुर, 04 दिसम्बर, आलीराजपुर बस स्टैंड पर सोमवार को आदिवासी समाज की अब तक की सबसे ऐतिहासिक, विशाल और जनसैलाब जैसी सभा आयोजित हुई। हजारों की संख्या में समाजजन एकत्र हुए और अपने संवैधानिक अधिकारों, विकास और न्याय की मांगों को लेकर एकजुट दिखाई दिए। इस पूरे जनआंदोलन का नेतृत्व आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने किया, जिन्होंने अपने तेज़ और सीधे वक्तव्य के जरिए सरकार पर तीखा प्रहार किया। महेश पटेल का सीधा सवाल कैबिनेट मंत्री सदन क्यों छोड़कर भागते हैं? सभा को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा कैबिनेट मंत्री नागरसिंह चौहान अपने विभाग से जुड़े सवालों का जवाब देने से बचने के लिए बार-बार विधानसभा से अनुपस्थित रहते हैं। सरकार आदिवासी मुद्दों पर मौन है, लेकिन अब समाज चुप नहीं बैठेगा अपनी आवाज़ पूरे प्रदेश और देश तक पहुंचाएगा।” उन्होंने कहा कि जल–जंगल–जमीन पर आदिवासी समाज का अधिकार जन्मसिद्ध है और अगर सरकार इन अधिकारों को छीनेगी, तो संघर्ष और तेज़ होगा। इसी दौरान पटेल ने जिले में चल रही अवैध यातायात सुरक्षा अभियान की सराहना भी की। उन्होंने कहा— हेलमेट बांटकर पुलिस अधीक्षक ने एक सराहनीय पहल की है। इससे जानें बचेंगी। मैं सभी युवाओं से अपील करता हूँ कि बाइक चलाते समय हेलमेट जरूर पहनें।” सभा समाप्त होने के बाद हजारों की भीड़ ने बड़े जनसैलाब के रूप में रैली निकाली। बाजारों और मुख्य मार्गों से होते हुए यह रैली टंट्या मामा चौराहे पहुंची, जहां समाजजनों ने टंट्या मामा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। टंट्या मामा चौराहे पर माल्यार्पण के पश्चात प्रतिनिधि मंडल ने SDM तापिस पांडे को 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मांगें इस प्रकार थीं किसानों को समय पर खाद–बीज की उपलब्धता, नर्मदा किनारे हटाने के आदेशों पर रोक, निवासरत परिवारों को वनाधिकार पट्टे छात्रावासों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार,आंगनवाड़ी और मध्यान्ह भोजन में पारदर्शिता,मनरेगा में पक्के निर्माण कार्य और मजदूरी के लंबित भुगतान,स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता से रोजगार,खदान नीलामी पर रोक और आदिवासी क्षेत्रों में कंपनियों की मनमानी पर नियंत्रण, मुवेल और बघेल का सरकार पर प्रहार—“आदिवासी को उजाड़ना लोकतंत्र के खिलाफ” सभा में धार लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी राधेश्याम मुवेल और कुक्षी के युवा आदिवासी नेता अर्जुन बघेल ने भी जोशीले भाषण दिए। मुवेल ने कहा नर्मदा किनारे बसे परिवारों को उजाड़कर कंपनियों को जमीन देना आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। सरकार उद्योगपतियों की सुनती है, लेकिन आदिवासी की नहीं। अर्जुन बघेल ने कहा—कुक्षी क्षेत्र में खदानों की नीलामी कर आदिवासी भूमि कंपनियों को देने की साजिश चल रही है। जब समाज विरोध करता है तो पुलिस के जरिए हमें दबाया जाता है और कंपनियों की सुरक्षा के लिए लेटर जारी किए जाते हैं। शिक्षा, छात्रावास, मनरेगा और रोजगार—हर जगह आदिवासी युवा पीड़ित है।” झाबुआ आदिवासी विकाश परिषद के जिला अध्यक्ष मथियास भूरिया ने आलीराजपुर आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष अंगर सिंह चौहान सहित अन्य वक्ताओं ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया सभी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि 10 सूत्रीय ज्ञापन सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की आवाज़ और अस्तित्व का सवाल हैं। आदिवासी समाज की खुली चेतावनी—“कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा”सभा के अंत में समाज ने सरकार को सख्त चेतावनी दी—यदि हमारी मांगों पर शीघ्र और ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो आदिवासी समाज प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”