रिपोर्टर: दीपक राज, किसान मजदूर मोर्चा भारत द्वारा तैयार किए गए कार्यक्रम के तहत, विभिन्न किसान मज़दूर संगठनों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर केंद्र और पंजाब सरकार के पुतले बनाकर जलाए गए। यह जानकारी वरिष्ठ किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने अमृतसर के गोल्डन गेट पर एक विशाल सभा और पुतला दहन के बाद दी। उन्होंने कहा कि किसान मजदूर मोर्चा की मुख्य मांगें हैं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए तुरंत मुआवजा, धान पर सत्तर हजार प्रति एकड़ और उसमें से दस प्रतिशत खेत मजदूरों को, पशुधन और पोल्ट्री फार्मों के लिए शत-प्रतिशत मुआवजा, सभी श्रेणियों के क्षतिग्रस्त घरों का शत-प्रतिशत मुआवजा, गेहूं की बिजाई के लिए तेल और खाद बीज सरकार द्वारा मुहैया करवाए जाएं, खेतों से रेत निकालने की समय सीमा हटाई जाए, पंजाब के बांधों से गलत प्रक्रियाओं से छोड़े गए पानी की जांच के लिए निष्पक्ष न्यायिक आयोग का गठन किया जाए, भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए नदियों को नहर जैसा बनाया जाए और उन पर स्थायी रूप से तटबंध बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि मुआवजे के लिए पांच एकड़ की शर्त हटाई जाए और सभी नुकसानों का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि जिस धान की फसल नष्ट होने पर सरकार 20 हजार का मुआवजा देने की घोषणा करती है, उसी धान की पराली जलाने पर किसानों पर 30 हजार का जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान शौक से पराली न जलाएं, सरकार स्वयं इसके लिए ठोस प्रबंध करे या फिर किसान को 200 प्रति क्विंटल या 6000 प्रति एकड़ दिए जाएं ताकि वह अपने स्तर पर इसका प्रबंधन कर सके, किसानों की गिरफ्तारियां, जुर्माना और रेड एंट्री बंद की जाएं। उन्होंने कहा कि दोहरी नीति के तहत एक तरफ सरकार ने कॉरपोरेट सेक्टर को खुली छूट दे रखी है जो 94% प्रदूषण फैलाता है, लेकिन कृषि क्षेत्र जो केवल 6% प्रदूषण फैलाता है और साल भर ऑक्सीजन देता है, उसके लिए सजा, जुर्माना और रेड एंट्री इस तरह से की जा रही है जिससे किसानों के मान-सम्मान को ठेस पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि मोर्चे के ऐलान के अनुसार अगर सरकार ने यह काम बंद नहीं किया तो अधिकारियों का घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं के कारण अपनी धान की फसल को नुकसान पहुंचा चुका है, इसलिए खरीद के समय कोई कटौती न की जाए, गन्ने का बकाया तुरंत जारी किया जाए, कपास और बासमती का सही दाम देने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ मुआवजा तुरंत जारी किया जाना चाहिए ताकि प्रभावित लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पटरी पर लौटने की ओर बढ़ सके। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के बावजूद 112 जगहों पर पुतला दहन प्रदर्शन किया गया है। इस अवसर पर बीकेयू एकता आजाद से जसविंदर सिंह लोंगोवाल, बीकेयू क्रांतिकारी से बलदेव सिंह जीरा, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी से सुखविंदर सिंह सबरा, बीकेयू दोआबा से मनजीत सिंह राय, किसान मजदूर हितकारी सभा से ओंकार सिंह भंगाला, बीकेयू भटेरी से दिलबाग सिंह गिल, बीकेयू भटेरी से जंग सिंह भटेरी, किसान मजदूर मोर्चा पंजाब के नेतृत्व में हजारों किसान मजदूर और महिलाएं विभिन्न स्थानों पर मौजूद थे।
किसान मजदूर मोर्चा ने पराली और बाढ़ के मुद्दे पर 19 जिलों में 112 जगहों पर केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ पुतला दहन किया
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