लोकसभा में माध्यस्थम और सुलह संशोधन विधेयक 2021 पेश

News Publisher  

नई दिल्ली, नगर संवाददाता: लोकसभा में बृहस्पतिवार को माध्यस्थम और सुलह संशोधन विधेयक 2021 पेश किया गया जिसमें संस्थागत मध्यस्थता को बढ़ावा देने में उत्पन्न कठिनाइयों को दूर करने और भारत को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता के केंद्र के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गई है। तीन नये कृषि कानूनों पर कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के बीच केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में माध्यस्थम और सुलह संशोधन विधेयक 2021 पेश किया। हालांकि बीजू जनता दल के बी महताब ने विधेयक पुरस्थापित किये जाने का विरोध किया। उन्होंने पूछा कि मंत्री बताएं कि विधेयक लाने की इतनी हड़बड़ी क्या है? इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विधेयक को पेश किये जाते समय इस संबंध में सदन के अधिकार पर प्रश्न उठाया जा सकता है, ना कि विधेयक के गुण-दोषों पर। उन्होंने कहा कि महताब ने विधेयक के गुण-दोषों की बात की है, जिस पर वह बाद में विस्तार से अपनी बात रखेंगे। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि संविदा या माध्यस्थम पंचाट सुनिश्चित करने में भ्रष्ट आचरणों के मुद्दे को पता लगाने के उद्देश्य से यह सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की गई थी कि सभी पक्षकार दलों को माध्यस्थम पंचाटों के प्रवर्तन पर शर्त रहित रोक का अवसर वहां मिले जहां अंतर्निहित माध्यस्थम समझौता या करार या माध्यस्थम पंचाट बनाना कपट या भ्रष्टाचार से प्रेरित है। इसमें कहा गया है कि प्रतिष्ठित मध्यस्थों को आकर्षित करके भारत को अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक माध्यस्थम केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के लिये अधिनियम की आठवीं अनुसूची को खत्म करना आवश्यक समझा गया। इसके अनुसार उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए माध्यस्थम और सुलह अधिनियम 1996 का और संशोधन करना आवश्यक हो गया। संसद सत्र में नहीं था और तत्काल उस अधिनियम में और संशोधन करना जरूरी हो गया था। ऐसे में राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 123 के खंड (1) के अधीन 4 नवंबर 2020 को माध्यस्थम और सुलह संशोधन अध्यादेश 2020 को लागू किया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *