नागौर, राजस्थान, गोविंद नारायण : नागौर जिले के मेड़ता रोड़ कस्बे की है। जहां जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार चलाए जा रहे रात्रि चौपाल और जनसुनवाई अभियान के तहत मेड़ता एसडीएम ने 2 दिन पूर्व मेड़ता रोड़ ग्राम पंचायत के सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी और सभी सरकारी विभागों के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता सहित क्षेत्रीय कर्मचारियों को जनसुनवाई और रात्रि चौपाल कार्यक्रम में उपस्थित होने के विशेष आदेश जारी किए थे। लेकिन ग्राम पंचायत की हठधर्मिता के चलते सरपंच और ग्राम पंचायत के कर्मचारियों ने जनसुनवाई कार्यक्रम को औपचारिक करने की ठान ली। लेकिन एसडीएम की दृढ़ता के आगे सफल नहीं हो पाए। जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर जितेंद्र कुमार सोनी द्वारा जिले भर में एसडीएम की अध्यक्षता में जनसुनवाई और रात्रि चौपाल कार्यक्रमों का आयोजन किया जाकर जनता को राहत दिलाई जा रही है। इसी क्रम में मेड़ता उपखंड अधिकारी ने मेड़ता रोड़ ग्राम पंचायत के सभी क्षेत्रों में टैक्सी पर लाउडस्पीकर लगाकर जनसुनवाई कार्यक्रम की जानकारी देने सहित विभिन्न प्रकार से प्रचार प्रसार करने के विशेष आदेश भी दिए थे। लेकिन सरपंच और संबंधित अधिकारियों ने जिला कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना करके काम में लापरवाही बरतते हुए जनसुनवाई को महज औपचारिक करने की ठान ली और बिल्कुल भी प्रचार-प्रसार नहीं किया। नतीजन जन सुनवाई के दौरान केवल उपखंड अधिकारी द्वारा निर्देशित सभी अधिकारी तो पहुंच गए थे। लेकिन ग्राम पंचायत से जुड़े एक भी फरियादी और अधिकारी, कर्मचारी तथा अधिकतर वार्डपंच भी नहीं पहुंचे। यहां तक की स्वयं सरपंच प्रेमा देवी भी मौके पर नहीं पहुंची जबकि सरपंच का आवास भी आयोजन स्थल से महज 200 कदम की दूरी पर है। और सरपंच की जगह सरपंच प्रतिनिधि मेघराज झोटवाल खुद एसडीएम और तहसीलदार के पास वाली सीट पर बैठ गए। जिसको लेकर मेड़ता एसडीएम शैतान सिंह राजपुरोहित ने नाराजगी जताई और मौके पर ही सरपंच प्रतिनिधि मेघराज झोटवाल सहित ग्राम सचिव और पटवारी से स्पष्टीकरण मांगा और खरी खोटी सुनाई। साथ ही अन्य विभिन्न विभागों के सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को तुरंत ही कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं एसडीएम ने 10 दिन बाद 28 सितंबर को दोबारा जनसुनवाई और रात्रि चौपाल कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर समाचार पत्रों के व्हाट्सएप ग्रुप सहित अन्य माध्यम से जैसे ही ग्रामीणों को रात्रि चौपाल की खबर लगी तो सरपंच सहित सरपंच प्रतिनिधि और ग्राम पंचायत के अधिकारियों की जमकर आलोचना भी करते दिखे।
वहीं उपखंड अधिकारी के आदेश करने के बाद आनन-फानन में आस-पड़ोस के लोगों को छोटे बड़े मुद्दे लेकर फरियादी बनाकर पेश किए। लेकिन एसडीएम के सामने एक की भी दाल नहीं गली और और भी ज्यादा आग बबूला हो गए। जिसके बाद भामाशाह रामनिवास लटियाल और उपसरपंच मनीष शर्मा ने जैसे-तैसे समन्वय बनाया और गांव से जुड़ी प्रमुख जन समस्याओं से अवगत करवाया। जिसको लेकर एसडीएम ने संबंधित मौजूदा अधिकारियों को समस्याओं के निदान करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम के दौरान एसडीम ऑफिस से अधिकारिक सूचना पाकर तहसीलदार भागीरथ चौधरी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से बीसीएमओ डॉ सुशील कुमार दिवाकर, विद्युत विभाग व जलदाय विभाग के कुछ अधिकारी व कर्मचारी जरूर मौजूद रहे। वहीं अनुपस्थित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित वार्डपंच और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अनुपस्थित होने के कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। वहीं ग्राम पंचायत की हठधर्मिता और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने को लेकर ग्रामीणों ने नागौर जिला कलेक्टर से कार्यवाही करने की मांग जताई है।
मेड़ता रोड़ में एसडीएम की अध्यक्षता में आयोजित जनसुनवाई और रात्रि चौपाल कार्यक्रम रहा महज औपचारिक
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